राहरौ ही था ,एक खाली से सफ़र का ,
आहट सुनी ,देखा कोई और भी है,
संगिनी ! ये जज्बातों का ताना-बाना नहीं है ,
यह एक मुसल्सल कहानी है,जिंदगी की
आसमां में सुराख का जज्बा भी नहीं
गंगा को खींचने की जूनून भी नहीं
छोटी-छोटी हसरतों और उमंगों की क्यारियां
एक मुट्ठी आसमां ,और पांव फ़ैलाने को जमीन
साथ चलने की कोई शर्त ना थी
बस साथ चलते रहे ,कुर्बती सहेजते रहे
आहट सुनी ,देखा कोई और भी है,
संगिनी ! ये जज्बातों का ताना-बाना नहीं है ,
यह एक मुसल्सल कहानी है,जिंदगी की
आसमां में सुराख का जज्बा भी नहीं
गंगा को खींचने की जूनून भी नहीं
छोटी-छोटी हसरतों और उमंगों की क्यारियां
एक मुट्ठी आसमां ,और पांव फ़ैलाने को जमीन
साथ चलने की कोई शर्त ना थी
बस साथ चलते रहे ,कुर्बती सहेजते रहे
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