आऊ सब मिल के शोक मनाबी
आऊ सब मिल के मौन राखी
परिवार के विध्वंश के ,समाज के विखंडन के
गामक तिरस्कार के , शहर लेल टपकैत लेर के
फुसियाही के आधुनिकता के ,देखौव्वल के अहंकार के
पाई के ग़ुलामी के , शिक्षा के बंध्याकरण के
परंपरा के मृत्यु पर , पाश्चात्य के यौवन पर
गायत्री के कारावास पर, उच्छृंखलता के अभयदान पर
राम के " रामा " पर , शिव के "शिवा" पर
बौआ के "बेबी " पर ,स्वामी के "हनी" पर
विवाह के धकियेनाइ पर , लिव - इन् के स्वागत पर
नाटक के इह -लीला पर , नाच के स्वागतम पर
आँगन के गैलरी पर , दालान के बालकनी पर
बहरी के सिमैटि के आँगन में घोसिएनाई पर
आऊ सब मिल के मौन राखी
परिवार के विध्वंश के ,समाज के विखंडन के
गामक तिरस्कार के , शहर लेल टपकैत लेर के
फुसियाही के आधुनिकता के ,देखौव्वल के अहंकार के
पाई के ग़ुलामी के , शिक्षा के बंध्याकरण के
परंपरा के मृत्यु पर , पाश्चात्य के यौवन पर
गायत्री के कारावास पर, उच्छृंखलता के अभयदान पर
राम के " रामा " पर , शिव के "शिवा" पर
बौआ के "बेबी " पर ,स्वामी के "हनी" पर
विवाह के धकियेनाइ पर , लिव - इन् के स्वागत पर
नाटक के इह -लीला पर , नाच के स्वागतम पर
आँगन के गैलरी पर , दालान के बालकनी पर
बहरी के सिमैटि के आँगन में घोसिएनाई पर
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