सोमवार, 26 अप्रैल 2010

उसकी माँ

कुछ दिन पहले कक्षा दस में पढ़ रही बेटी ने "उसकी माँ" कहानी का जिक्र किया.पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र की लिखी कहानी पढ़कर काफी प्रभावित थी वह.उसने तो यहाँ तक कह डाला की इनसे अच्छा
कोई हिंदी लेखक नहीं हो सकता.खैर मेरा इन सब से बहुत असर नहीं पड़ा मैं प्रभावित था उसकी संवेदना को देखकर।

हृदय खुश हुआ यह सोचकर की आज भी संवेदना जीवित है इन छोटे बच्चों में।

हमने कहानी संकलन में यह कहानी पढ़ी थी,स्कूल में
। हम भी इसी तरह काफी व्यथित हो गए थेs . कहानी है एक माँ ,उसके क्रन्तिकारी पुत्र ,और उसके कुछ मित्रों का जो आज़ादी के जंग में गिरफ्तार हुए और शायद अंततः उन्हें फांसी की सजा हुई.एक माँ और उसके देशभक्त पुत्र के स्नेह और प्यार का अद्भुत चित्रण है.बच्चों द्वारा मां को पत्र लिखना और ऐसा पत्र जिससे यह न पता चले के यह बच्चे फांसी की सजा पाए हुए हैं.माँ को मिलना,हसना खेलना. अंत में बच्चों को फांसी की सजा होती है और बच्चे जो एक दिन पहले माँ से मिलकर आये थे अंत तक माँ को खुश रखने की कोशिश करते हैं और जिस दिन फांसी की सजा होती है उसी दिन माँ मृत पायी जाती है अपने चौखट के बाहर और उसके हाथ में बच्चों का आखिरी पत्र होता है।
माँ की ममता ,उसकी करुना और उसका प्यार इसके बाहर जा कर न हमने सोच न हमारी बिटिया ने.हम दोनों ने चर्चा की और कहानी को महसूस किया।
आज के सन्दर्भ में अगर बुद्धिजीवियों से इसकी चर्चा करें तो स्त्री पराधीनता से लेकर पुरुष प्रधान समाज सबको इस कहानी के ब्याख्या से जोड़ दिया जायेगा और मूल बात जो माँ की ममता और देशभक्त जवानों की वीरता सब कुछ गौण हो जायेगा।
मुझे अच्छा लगा अपने बच्चे से इसका जिक्र सुनकर और हमने अपने आप को सीमित रखा कहानी के अक्षरों तक.

3 टिप्‍पणियां:

  1. हमेशा की तरह उम्दा रचना..बधाई.

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  3. वाकई बहुत अच्छा प्रस्तुतिकरण है.. वैसे मूल रूप से इसका विषयवस्तु माक्सिम गोर्की की कहानी 'मदर' से लिया हुआ है, लेकिन 'उग्र' ने इसे भारतीय क्रांति से काफी अच्छी तरह जोड़ा है..

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